प्राकृतिक चिकित्सा नेचुरोपैधी / naturopathy भाग 2

सेबसि्टयन नीप
फादर नीप (Sebastian Kneipp) ने जल चिकित्सा पर अनेकों प्रयोग व आविष्कार किये। इन्होने जल चिकित्सा का प्रयोग कर बड़ी सफलता प्राप्त की। इन्होने एक स्वास्थ्य गृह का संचालन 45 वर्षों तक कुशलता पूर्वक किया तथा उसके द्वारा अनेकों लोगों को प्रशिकि्षत किया। इनके नाम से जर्मनी में एक नील स्टोर्स है जहां जड़ी-बूटियों, तेल, साबुन तथा स्नान सम्बन्धी आवश्यक वस्तुएं तथा स्वास्थ्यप्रद प्राकृतिक भोजनों का प्रदर्शन किया जाता है। इन्होने सन् 1857 ई. में जल चिकित्सा पर "My Water Cure" नामक पुस्तक लिखी जिसका हिन्दी रूपान्तरण 'जल चिकित्सा के नाम से आरोग्य मंदिर, गोरखपुर से प्रकाशित हुआ है।

आर्नल्ड रिक्ली

अर्नाल्द रिक्ली (Arnold Rickli) एक व्यापारी होते हुए भी प्राकृतिक चिकित्सा से प्रभावित होकर व्यापार छोड़कर इस चिकित्सा क्षेत्र में आ गए। इन्होने प्राकृतिक चिकित्सा में एक अध्ययन वायु चिकित्सा एवं धूप चिकित्सा को जोड दिया। बाद में इन्होने सन् 1848 ई. में आसि्ट्रया में धूप और वायु का एक सेनेटोरियम स्थापित किया जो संसार का प्रथम प्राकृतिक चिकित्सा भवन बना।

एडोल्फ जुस्ट

एडोल्फ जुस्ट (Adolf Just) जर्मनी के रहने वाले थे। इनके द्वारा मिट्टी चिकित्सा का विकास तथा प्रयोग करने के बाद इसकी उपयोगिता और महत्ता को माना जाने लगा। इन्होने मिद्री के अनेकों प्रयोग कर रोगों की चिकित्सा की। इनके द्वारा ही मालिश की कि्रया का जन्म भी हुआ। इन्होने महत्वपूर्ण पुस्तक "Return to nature" भी लिखी जो आज संसार भर में सुप्रसिदि्ध प्राप्त कर रही है

डॉ° आर्नल्ड (Arnold Ehret) भी प्रसिद्ध चिकित्सकों में से

हैं। ये जर्मनी के रहने वाले थे परन्तु इनका कार्यक्षेत्र अमेरिका था। इन्होने प्राकृतिक चिकित्सा की फलाहार और उपवास की पद्धति पर अधिक जोर दिया तथा बडे बडे रोगों को केवल आहार तथा उपवास द्वारा ही मार भगाया। इन्होने कई पुस्तकें लिखी जिनमें से दो पुस्तके अधिक प्रसिद्ध है- "Rational fasting" और "Mucusless Diet healing system'l

हेनरी लिण्डल्हार

हेनरी लिण्डल्हार (Henry Lindlahr) का जन्म 1 मार्च 1953 को हुआ। इन्होने अपना सम्पूर्ण जीवन प्राकृतिक चिकित्सा के प्रचार प्रसार में लगा दिया। इन्होने प्राकृतिक चिकित्सा से होने वाले लार्भोंों तथा प्रभावों को वैज्ञानिक आधार द्वारा प्रस्तुत किया इन्होने प्राकृतिक चिकित्सा के सिद्धान्त तीव्ररोग अपने चिकित्सक स्वयं होते हैं का समर्थन दिया जबकि प्राकृतिक चिकित्सा के सिद्धान्तों के विरूद्ध जाकर रोगों उपचार में दूसरी पद्धतियों की औषधियों के सेवन पर जोर दिया। सन 1904 में 51 वर्ष की अवस्था में एम.डी. की उपाधि प्राप्त की। इन्होंने कई पुस्तकें लिखी जिनमें मौलिक पुस्तकें, 'फिलोसफी ऑफ नेचर केयर, प्रेकि्टस ऑफ केयर कुक बुक इनके अपने निजी अनुभवों द्वारा सम्पादित की हुई है.

बेनिडिक्ट लुस्ट

बेनिडिकट लस्ट (Benedict Lus), फादर नीप के पि्रय शिष्यों में से एक थे। इनका जन्म 3 फरवरी 1872 ई. को हआ था। इन्होने प्राकृतिक चिकित्सा का प्रचार प्रसार अमेरिका में जाकर किया। अमेरिका में ही इन्होने नीप-वाटर क्योर नामक एक मासिक पत्र निकाला तथा बाद में एक पत्र नेचर्स-पाथ भी स्थापित किया इनके द्वारा न्यूयार्क में एक स्कूल तथा कालेज की स्थापना की। जो अब सुप्रसिद्ध यंग बार्न्स अस्पताल में परिणत हो गया है । यही नहीं इसके अतिरिक्त भी इन्होने कई अन्य अस्पतालों स्कूलों तथा संस्थाओं की भी स्थापना की। इनका देहान्त 1950 ई. अपने द्वारा स्थापित अस्पताल में ही हुआ।

जे. एच. टिल्डेन

जेम्स हेनरी टिल्डेन (John Henry Tilden) जन्म अमेरिका में हुआ। इन्होने उपचार में कारणों को दूर करने पर जोर दिया जिनके द्वारा रोग उत्पन्न होते है। तथा रोगी को प्राकृतिक जीवन जीने की शिक्षा पर भी इन्होने बल दिया इन्होने प्रसिद्ध पुस्तक "Impaired health" भी लिखी

हेनरिच लेमैन

हेनरिच लेमैन (Johann Heinrich Lahmann ) जर्मनी में रहने वाले तथा एलोपैथी को मानने वाले थे। परन्तु बाद में इन्होने ड्रेसडेन में एक स्वास्थ्य-गृह भी बनाया जिसके द्वारा इन्होने मानव स्वास्थ के लिए पोषक तत्वों की आवश्यकता पर अनुसंधान किए तथा यह सिद्ध किया कि स्वस्थ रहने के लिए आहार ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

बरनर मैकफेडन

बरनर मैकफेडन (Bernarr Macfadden) बहुत ही प्रसिद्ध चिकित्सक थे। इन्होने पूरा जीवन प्राकृतिक जीवन व व्यायाम पद्धतियों का अनुभव कर उसे प्रयोग करके रोगों को दूर करने पर जोर दिया व्यायाम पद्धतियों का स्वयं अनुभव करके "फादर ऑफ फिजिकल कलचर" की उपाधि को प्राप्त R271 3 "Book of health", Fasting for health" aeT "Macfaddens eneyolopedia for physical culture' आदि दर्जनो पुस्तकों भी लिखी। उपवास पर इन्होने अपनी पकड़ बनाई तथा उपचार में
इसका प्रयोग किया. 

सर विलियम अर्बुथनाट लेन

सर विलियम अर्बुथनाट लेन (Sir William Arbuthnot Lane) एक एलोपैथी के चिकित्स थे फिर भी इन्होने प्राकृतिक चिकित्सा के प्रभावों से खूब प्रभावित हुए तथा इस पर विश्वास करके इन्होने इसका खुब प्रचार प्रसार किया। इन्होने एक सुप्रसिद्ध पुस्तक "Good Health" भी लिखी

जे. एच. केलाग

जॉन हावें केलॉग (John Harvey Kellogg) को पूरा संसार प्राकृतिक चिकित्सक के नाम से जानता है। इनका जन्म 26 फ़रवरी सन 1852 ई. को अमेरिका में हआ। इन्होने एक विषष प्रकार का बैटिल क्रीक सेनीटोरियम बनाया जिसमें सभी चिकित्सा प्रणालियों जैसे जल चिकित्सा, आहार चिकित्सा, शल्य चिकित्सा, स्वीडिश मूवमेन्ट तथा विद्युत चिकित्सा आदि द्वारा उपचार होता है। इन्होने प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में कई प्रकार के आविष्कार भी किए जिनमें विद्युत ज्योतिस्नान (Electric lights bat) महत्वपूर्ण है। इसके अतिरिक्त इन्होने "दि न्यु डायटेरिक्स", "रेशनल हाइड्रोथिरैपी" तथा "होम हैंड बुक ऑफ हाइजीन एण्ड मेडिसिन" आदि पुस्तकें भी लिखी

सर विलियम

यह भी हेनरिच लेमैन तथा सर विलियम की तरह ही एक प्रसिद्ध ऐलोपैथी के चिकित्सक होते हुए भी प्राकृतिक चिकित्सा में अगाध विश्वास रखते थे। इन्होंने "The principles practice of medicine" नामक प्रसिद्ध पुस्तक लिखी

ब्ले सेलमन एम. डी., विन्टर निट्रल, आटो कार्क, एडगर, जे. सैकसन शेल्टन, इलियर, पंज, ओसवाल्ड, हरबर्ट स्पेन्सर, टर्न वेटर जान, बोन पीजली, हैन्स माल्टेन, एडविन बैबिट एन डी., मिल्टन पावल आदि अनेकों ही और भी चिकित्सक हैं जिन्होने अपना जीवन प्राकृतिक चिकित्सा को समरि्पत किया तथा इसके द्वारा रोगों का उपचार करके अनेकों रोगों पर विजय प्राप्त की।

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